दीपावली पर मां से प्रार्थना (एक कविता)2

दीपावली आई 
मन में खुशियों की सौगात लाई 
किसी ने कुछ न कुछ खरीदा 
किसी ने चांदी
तो किसी ने सोना

परंतु मेरे मन ने तो 
कुछ और ही सोचा
क्यों न एक 'सुई' खरीद लू 
सपनों को बुन सकूं 
उतनी 'डोरी' खरीद लू

कुछ लोग हसरते बदलते हैं 
कुछ चेहरे बदलते हैं 
किसी ने नोट बदले
पर 
मैंने तो अपनी ख्वाहिशे हीं बदल ली
जिन्दगी के शौक कम करके
सुकून की जिन्दगी खरीद ली

खुशियों की दीपावली तो हर साल आती है 
कितनों को खुशी देकर 
न जाने 
तो कितने का दिवाला निकाल जाती है
माँ 
मुझ ॐ जितेंद्र सिंह तोमर की 
इतनी सी ही प्रार्थना है तुझसे..
मां
दीपावली पर इस बार
धन बरसे या न बरसे..
पर 
अब के बाद कोइ गरीब..
दो जून की रोटी के लिए न तरसे..
दो जून की रोटी के लिए न तरसे..

लेखक

ॐ जितेन्द्र सिंह तोमर

13.00/4/4/11/2021
          

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