आधुनिक नरसी और उसका भात
आधुनिक नरसी और उसका भात
शिवपुरी-बदरवास जनपद में एक गांव है एजवारा। एजवारा में एक शादी होनी थी। आखिर यह सब इतना खास क्यों है जिसका वर्णन कर रहे हैं तो आपको याद दिला दें कि इसने हमें नरसी के भात के प्रसंग की याद दिला दी।
नरसी का भात, कहानियां और किस्सों तक ही सीमित नहीं है। वह भारतीय जीवन में आज भी विद्यमान है, कलयुग में 23 नवंबर 2021 को घटित इस घटना ने पुराग्रंथों में वर्णित नरसी के भात की याद को बिल्कुल ताजा कर दिया और उन लोगों के मुंह बंद कर दिए है। जो इसे एक कोरी कथा बताते हैं।
हुआ यूं कि उत्तर प्रदेश के शिवपुरी-बदरवास जनपद के एक गांव एजवारा में निवास करने वाले थान सिंह यादव की पुत्री के विवाह 23 नवंबर 2021 को होना था।
हिंदू विवाह रीति रिवाज में भात भरना एक महत्वपूर्ण रस्म होती है। लड़के या लड़की का मामा विवाह में लड़की के परिवार के लोगों को भात पहनाता है।
थान सिंह के परिवार में पहली शादी होने से खुशी का माहौल तो था, लेकिन दुल्हन के सगे मामा नहीं होने से मंडप के नीचे भात पहनाते वक्त की रौनक गायब थी।
जब शादी की तारीख नजदीक आने लगी तो दुल्हन की मां को अपने मायके और पिता की याद सताने लगी। जब खोज खबर की तो पता चला कि वे उत्तरप्रदेश के गौतमबुद्ध नगर के जेवर शहर में साधु भेष में रहते हैं। दुल्हन की मां ने जब साधु भेष धारण करे हुए पिता से मुलाकात की तो पता चला कि वे 30 वर्ष पहले ही साधु-सन्यासी हो कर घर-बार छोड़ चुके थे।
इस समय सन्यासी पिता ने अपनी पुत्री की कोई भी सहायता करने से इंकार करते हुए शादी में आने से भी मना करते हुए कहा, " मैं, अब सन्यासी जीवन धारण कर चुका हूंँ । जिसके चलते मैं अब किसी शादी समारोह में शामिल नहीं हो सकता। अब आप जा सकते हो।"
बेटी अपने पिता के सामने बहुत रोई, बहुत गिड़गिड़ाई, उनसे रोते हुए बहुत विनती की। उनके आगे हाथ तक जोड़े लेकिन साधु ने अपने बेटी की एक ना सुनी और भात देने तो दूर शादी में जाने से भी मना कर दिया।
जब सब घटित हो रहा था तब वहां अनेक लोगों के बीच एक व्यक्ति ऐसा भी था जो यह सब देख और सुन रहा था। उसने सारी घटना को अच्छी तरह से समझ लिया। बिना भाई की बहन का कृंदन सुना, तो उससे रहा नहीं गया। उसने उसी समय मन ही मन कुछ फैसला लिया और वह सीधे अपने घर पहुंचा और सारी कहानी अपने परिवार को सुनाई। सभी इस कहानी को एक घटना की तरह सुनकर भूल चुके थे। उस व्यक्ति ने सबके चेहरों को देखा।
वे बोले, " कोई सहमत हो या न हो। मैंने फैसला किया कि जिस तरह से भगवान कृष्ण ने नरसी भगत की बेटी भात पहनाया था, उसी तरह यह गोपाल भी उस बहन को भात पहनाने जाएगा।"
"तो क्या हुआ ? इस फैसले में, मैं आपके साथ हूं।" कहकर उनकी पत्नी उनके साथ खड़ी हो गई। उसके इस फैसले से उनका परिवार भी खुशी-खुशी सहमत हुआ।
शादी से 2 दिन पहले ही 21 नवंबर को वे नोएडा के निकट से शादी में चढ़ाए जाने वाले भात का सामान लेकर रवाना हुए और एतबरा पहुंच कर शादी का सारा कार्यभार देखने लगे।
जब 23 नवंबर 2021 को उस व्यक्ति के परिवार ने सबके सामने भात पहनाया तो लोगों की आंखें, खुली की खुली रह गई।
शादी में दुल्हन के लिए जो सामान भात में दिया गया, उसमें करीब 9 तौले सोने के जेवर, 1 किलो चांदी के जेवर, दूल्हे के लिए एक स्मार्ट फोन, 1 लाख नगदी, गांव की सभी महिलाओं के लिए करीब साढ़े तीन सौ साडिय़ां, सभी गांव वालों के लिए करीब 100 जोड़ी पेंट-शर्ट तथा तौलिया भेंट कर सम्मान सहित भात पहनाया।
साथ ही प्रत्येक बाराती के लिए उपहार स्वरुप लाए गए करीब 700 तौलिया भी भात में शामिल थे।
यह शादी रातों-रात आसपास के क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई।
जानते हैं यह व्यक्ति कौन था? यदि नहीं। तो हम आपको बता दे कि यह नोएडा के जेवर शहर के फुटवियर व्यापारी गोविंद सिंघल थे।
मैं उनके जज्बातों को सल्यूट करता हूं। भगवान को धन्यवाद देता हूं कि कलयुग में आज भी आपके जैसे लोग हैं।


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