खाटू श्याम यात्रा
खाटू श्याम यात्रा
सुंदर सजा दरबार खाटू श्याम का भक्तो।
डंका बजे दुनिया में श्याम नाम का भक्तो।
(१)
हम यात्रा गाते हैं घाटू श्याम की भक्तों
जय बोल के शुरू करेंगे श्याम की भक्तों
गाते हैं जिनकी वंदना सुर और मुनि जन
श्रेष्ठ है कलयुग में श्याम नाम का वंदन
बिगड़ी हुई तकदीर सवरती है धाम पे
होती सुबह शुरू यहां श्याम नाम से
जग में है ऊंची श्याम खाटू श्याम की भक्तों
जय गूंजती यहां पर श्याम नाम की भक्तों
मिलती नहीं जग में कहीं ऐसी मिसाल है
बाबा का बेमिसाल यहां पे कमाल है
आओ करें यात्रा श्री श्याम नाम ले
भली करेंगे श्याम की जी का हाथ थाम ले।
पावन है धाम चल रहे धाम चल रे चल खाटू श्याम चले
सुंदर सजा दरबार खाटू श्याम का भक्तो।
डंका बजे दुनिया में श्याम नाम का भक्तो।
(२)
दुखड़े सदा हर ले जो श्याम नाम है ऐसा
बिगड़ी को दे सवार श्याम धाम है ऐसा
जप श्याम श्याम श्याम श्याम श्याम नाम को
चल खाटू धाम धाम धाम धाम खाटू धाम को
शीश के दानी दयालु श्याम है मेरे
पूरण करेंगे श्याम जी हर काम को तेरे
ऐसे दयालु दानी जग में और नहीं कहीं
अहिलवती के लाल-सा दूजा न कहीं है
भक्तों के नाम की है पतवार श्याम जी
देते सदा लख लख दातार श्याम जी
सुंदर सजा दरबार खाटू श्याम का भक्तो।
डंका बजे दुनिया में श्याम नाम का भक्तो।
(३)
पावन धरा मरुधरा पर धाम है पावन
जय श्याम श्याम श्याम श्याम नाम है पावन
सीकर है जिला एक मरू देश में जहां
एक गांव खाटू धाम के है नाम से वहां
अहिलवती के लाल का दरबार है यहां
सुंदर सजीला श्याम सरकार है यहां
हारे को सहारा सदा देते हैं श्याम जी
हर पल सदा खाटू में रहते हैं श्याम जी
एक बार श्याम जी के जो दरबार आ गया
हर बार आ गया वो बार बार आ गया।
सुंदर सजा दरबार खाटू श्याम का भक्तो।
डंका बजे दुनिया में श्याम नाम का भक्तो।
(४)
चढ़ते हैं ध्वजा नारियल निशान यहां पे
हे श्याम की अद्भुत निराली शान यहां पे
बैठा हो जैसे सेठ दरबार लगा के
बैठा है मेरा श्याम जरा देख ले आके
झांकी सजी है श्याम की नजरें नहीं भरतीं
जितना भी देखता हूं कामना यही करती
बस देखता रहूं मैं श्याम श्याम की सूरत
मन भा गई मेरे तो श्याम श्याम की मूरत
विश्वास लेके जोमन में श्याम जी के द्वारे आ
जग जाएगी सोई हुई तकदीर यहां
सुंदर सजा दरबार खाटू श्याम का भक्तो।
डंका बजे दुनिया में श्याम नाम का भक्तो।
(५)
खाटू के जैसा धाम जग में दूसरा नहीं
दरबार श्याम जी के जैसा और ना कहीं
आओ करें हम यात्रा खाटू के धाम की
जय बोल के शुरू करेंगे श्याम नाम की
जयपुर बीकानेर राजमार्ग पे रिंगस
श्याम जी के धाम पे जाती यहां से बस
रिंगस के लिए रेल मार्ग भी रहे उत्तम
होती है रेलगाड़ियों की यात्रा सुगम
रिंगस से 18 किलोमीटर पर धाम है
मेरे बाबा श्याम रहते हैं वो खाटू गांव है
है धन्य खाटू धाम धन्य खाटू गांव की भूमि
श्री श्याम ने अपने लिए जगह यही चुनी।
सुंदर सजा दरबार खाटू श्याम का भक्तो।
डंका बजे दुनिया में श्याम नाम का भक्तो।
(६)
हर माह में आती है शुक्ल पक्ष की ग्यारस
इस रोज खाटू धाम में रहता है बड़ा रस
लगते यहां मेले बड़े हर साल में है दो
आओ चलें श्री श्याम के दर्शन का लाभ लो
कार्तिक सुदी एकादशी लो आ गई पावन
श्याम जन्म देख के हर्षित हुआ है मन
फाल्गुन माह और शुक्ल पक्ष की है दशमी
मेला लगे ऐसा न जाए बात भी बरनी
द्वार पर आते हैं भक्त दूर-दूर से
गुजरात महाराष्ट्र कोई कानपुर से
सुंदर सजा दरबार खाटू श्याम का भक्तो।
डंका बजे दुनिया में श्याम नाम का भक्तो।
(७)
बंगाल कोलकाता गुवाहाटी आसाम से
हरियाणा से भी आते हैं बाबा के धाम पे
साउथ में दिल्ली से कोई ही बेंगलुरु से
धाम पे आते हैं भक्त दूर-दूर से
मरू प्रदेश के बसे जन-जन में श्याम जी
हर पल यहां रहते हैं इनके मन में श्याम जी
भक्तों की हर घड़ी लगी रहती कतार है
सबको भला लगता है वो खाटू का द्वार है
साफ मन से कामना जो लेके आ गया
समझो वह दूजे पल में जो मांगा सो पा गया
सुंदर सजा दरबार खाटू श्याम का भक्तो।
डंका बजे दुनिया में श्याम नाम का भक्तो।
(८)
अब ध्यान से सुनो नियम बता रहे हैं हम उनकी भी करो पालना सुना रहे जो हम घर भावना हो साफ स्वच्छ तन रहे विमल
मन में अपार श्रद्धा हो विश्वास हो अटल
यात्रा से पूर्व ध्यान श्याम का धरो
बाबा की ज्योत लेके पूजा अर्चना करो
निशान बाबा का जो लेकर जाना चाहो तुम निशान की पूजा के नियम कह रहे हैं हम
निशान की पूजा का जो विधान है सुनो पहले स्नान करके फिर निशान को छू
(९)
डंडे में दाल के निशान को सजाइए
मोर पंख फूल माला को लगाइए
शीर्ष पर चांदी का छत्र ऐसा बांध दो
फिर शाम शाम शाम शाम शम नाम लो
केसरिया बंद हो दुपट्टा गले में हो
जला की धूप दीप बाबा की ज्योत लो
श्रद्धा के अनुसार प्रसाद तुम करो
तस्वीर सांवरे कि तुम्हारे समक्ष हो
पूजा करो भजन करो जयकारा लगाओ
वह भली करेंगे बाग बालाजी उनको भी मनाओ मिश्री के साथ में वर्कर प्रसाद है उत्तम
पूजा के बाद कीजिए प्रसाद का वितरण
(१०)
चित्र को निशाने पर अर्पण करो भक्तों
भक्तों में इश्क बाद में वितरण करो भक्तों
कमर पर होनी बार में लोहे की कटोरी
रख के निशान हाथ में थाम लो डोरी
शंकर भी यात्रा का सब साथ में करो
सांवली सरकार का ध्यान सब धर्म
जय श्याम की जय श्याम की गाते हुए चलो
मार्ग में जो भी मिले जय श्याम की कहो
भद्दे निकाले बस आपके तंत्र
चमड़े की कोई वस्तु रह नहीं पाए बदन पर
(११)
खाटू में सभा मंकी फेरी लगाइए
निशान को बाबा के दरबार लाइए
अर्पण करो श्री श्याम के चरणों में निशान
हुई है आप की दया से यात्रा आसान
हनुमान का भी जो निशान साथ में लाएं
उसका भी हनुमान के चरणों में चढ़ाए
पूर्ण करेंगे कामना श्री श्याम बिहारी
सब का भला करते हैं तीन बाण धारी
बस और रेल मार्ग से जो भक्त आ रहे
उनको भी यह बात हम जहां बता रहे
(१२)
जब खाटू धाम आप पहुंच जाओगे
भक्तों मन में नई उमंग एक पाओगे
भक्तों शहर के धर्मशाला में विश्राम कीजिए
इस राम की भी वक्त श्याम नाम लीजिए
भरी पड़ी है धर्मशालाएं खाटू धाम में
मिल जाती है जगह बाबा के नाम से
खुला हुआ मंजर मेरे श्याम का यहां
सजा हुआ दरबार मेरे श्याम का यहां
विश्राम के पश्चात करना चाहिए स्नान
कपड़े बदल के स्वच्छ साफ स्वच्छ कीजिए प्रस्थान
(१३)
अपने सामान की सुरक्षा आप कीजिए
श्री श्याम श्याम श्याम श्याम श्याम जाप कीजिए
मंदिर के सामान तुम्हें प्रसाद मिलेगा
प्रसाद अपनी श्रद्धा अनुसार मिलेगा
प्रसाद लेके साथ में पंगत में खड़े हैं
भक्तों को लेके साथ में खड़े हैं
सुंदर सजा दरबार सामने है शाम का
मुरली सुमन गिरधर गोपाल का
पंगत में खड़े होके पीछे देखना नहीं
अप शब्द आपने मुखसे कभी बोलना नहीं
छोटा बड़ा जो भी मिले सब का सम्मान हो
न भेद भाव मन में न अभिमान हो
(१४)
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