क्यों लगा 'गया' कि 'फल्गु नदी' को श्राप ?

भगवान की कृपा से आज तक किसी भी अदालत में सुनवाई होते हुए नहीं देखनी पड़ी, लेकिन मैंने चलचित्र अर्थात फिल्मों में देखा है कि लोग गीता और अन्य पवित्र ग्रंथों पर हाथ रखकर कसम खाते हैं । तो मुझे पुराणों में वर्णित एक घटना की याद आई जिसमें देवी स्वरूपा फल्गु नदी को भी श्राप भोगना पड़ा था। 

आइए बताते हैं क्या है यह कहानी ?

हमारे भारत की प्रायः सभी नदियों में पूरे वर्ष पानी की कोई न कोई धार बहती रहती है , लेकिन गया (बिहार) में , जहां कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने माता पिता आदि पूर्वजों की मुक्ति के लिए आते हैं । यहां फल्गु नदी में एक बूंद भी पानी नहीं स्थिर होता है । सम्पूर्ण नदी का जल चौमासा समाप्त होते ही ऐसे विलीन हो जाता है जैसे रास्तों के गड्ढे का पानी समाप्त हो जाता है। ऐसा एक श्राप के कारण होता है, आइए बताते हैं कि यह श्राप किसने और क्यों दिया था?

सीता जी ने वनवास काल में दशरथ जी का श्राद्ध किया था । राम जी से सीता जी ने कहा, " हाँ जी ! हमने फल्गु नदी में श्राद्ध किया तो पिताजी का हाथ निकल आया था। इस पर हमने उनके हाथ में ही उनके कहने पर मिट्टी का पिण्ड बनाकर दे दिया है। "

राम जी ने कहा, "इसका कोई साक्षी है क्या ?" 

तो सीता जी ने कहा, " हां, क्यों नहीं ? यह फल्गु नदी ही साक्षी है।" 

राम जी ने फल्गु नदी से पूंछा तो नदी ने कहा, "भगवन् ! हमने तो नहीं देखा कि दशरथ जी का हाथ निकला और सीता जी ने उनके हाथ में पिण्ड दिया है।"

बस, फिर क्या था, सीता जी को गुस्सा आ गया उन्होंने फल्गु नदी को श्राप दिया, " हे, फल्गु नदी ! तुमने आर्य से जानबूझकर और मुझे झूठा बनाने के लिए, खुद तुमने झूंठ बोला है। जा, मैं तुझे श्राप देती हूं कि आज से तुम्हारे पास जल ही नहीं रहेगा। सभी जीव तुम्हारे पास से प्यासे लौटेंगे और तुम्हें धिक्कारते हुए जाएंगे।"

सीता जी के इसी श्राप के कारण आज भी फल्गु नदी में पितृपक्ष के बाद पानी की एक बूंद भी दूर दूर तक दिखाई नहीं देती है। मगर नदी के प्रभा छेत्र में एक से दो फीट का गड्ढा खोदने पर उसमें पानी निकल आता है। इसी कारण आज भी नदी के अंदर एक या दो फुट खोद कर, पानी निकाल कर पिण्डदान करते हैं। 

मैं सोचता हूं कि असत्य बोलने का परिणाम यदि देवी स्वरूपा नदियों को भी भोगना पड़ता है तो अदालत में समाज में कहीं झूठी गवाही देने का परिणाम मनुष्य को क्यों नहीं भोगना पड़ेगा। अवश्य ही भोगना पड़ता है । 

वेदों में लिखा है कि " नानृतं ब्रूयात् " झूठ नहीं बोलना चाहिए

 राधे राधे जय श्री कृष्णा।

लेखक
ॐ जितेन्द्र सिंह तोमर
11.30/6/9/10/2021

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