36. मोबाइल का फंडा (हास्य) || अथवा || इसे कहते हैं सर्विस (हास्य)
36. मोबाइल का फंडा (हास्य)
अथवा
इसे कहते हैं सर्विस (हास्य)
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एक महिला तेजस ट्रेन में अपने 4 साल के बच्चे के साथ यात्रा कर रही थी कि तभी उस बच्चे को टॉयलेट की लगी और उसने मम्मी से कहा, " मम्मी-मम्मी मुझे टायलेट जाना है।"
मम्मी को उसके साथ टॉयलेट जाना पड़ा। उसकी मम्मी ने उसे टायलेट में बैठाकर दरवाजा बंद कर दिया। उसके कुछ देर बाद मम्मी ने बाहर से ही पूछा, " बेटा ! कितनी देर लगेगी..?"
लड़का बोला, "पांच मिनट।"
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उसकी मम्मी ने कहा, "ठीक है बेटा ! आराम से कर ले, मैं बाहर ही खड़ी हूं। "
कहकर वह महिला अपने मोबाइल में व्यस्त हो गई।
बच्चा टॉयलेट से जल्दी ही निवृत हो गया और खुद साफ सफाई करके, पैन्ट पहन कर बाहर निकल कर पास में पेंट्रीकार की तरफ जाकर ट्रेन की होस्टेस के साथ खेलने लगा।
😁
अब हुआ ऐसा कि इसी ट्रेन में अपने चड्डा साहब भी पहली बार सफर कर रहे थे और उनको भी टायलेट लगी .. और वो उसी टायलेट में चले गये...
चड्डा साहब आराम से हल्के हो रहे थे कि उस बच्चे की मम्मी ने बाहर से दरवाजा खटखटाया और बोली, " अरे ! हो गई हो तो धुलवा कर पैंट पहना दूं।"
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यह सुनते ही चड्डा साहिब तो *गदगद* हो गये और उनकी आखें *खुशी से नम* हो गयीं और बुदबुदाये, इसे कहते है "सर्विस" और इस से ज़्यादा बेचारे मोदी जी क्या करें।"
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जब बाहर से दोबारा आवाज आई तो चड्ढा जी बोले, " रहने दो मोहतरमा। मैं तेजस ट्रेन कि इस सर्विस से खुश हूं और मैं शिकायत सुझाव पुस्तिका में इस बात का धन्यवाद भी कर दूंगा।"
जब महिला ने मोबाइल में देखा तो पाया कि उसे एक घंटा हो चुका है। अंदर से चड्ढा की आवाज का ध्यान आते ही वह तो बेहोश हो गई।

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