30. हे राम मुझे एक साली दो (हास्य कविता)

30. हे राम मुझे एक साली दो (हास्य कविता)

हे राम मुझे एक साली दो
गोरी दो या काली दो
सीधी दो या नखरे वाली दो
हे राम मुझे एक साली दो।

मोटी हो चाहें ककड़ी सी
पतली हो चाहे हाथी सी
गोरी हो चाहे 
तवे के जैसी
चाहे काली हो 
वह दूध के जैसी
सीधी दो या लड़ने वाली दो 
हे राम मुझे एक साली दो
गोरी दो या काली दो।


मीठी हो चाहें करेले सी
चाहें कडवी हो रसगुल्ले सी
लम्बी हो चाहें बकरी जैसी
नाटी हो वे ऊँट जैसी
साधारण दो या निराली दो
असली दो या जाली दो
हे राम मुझे एक साली दो
गोरी दो या काली दो।


बोली हो चाहें कोए जैसी
या ककर्ष हो कोयल जैसी
चाहे मोरनी हो दुल्लती झाड़
या कछुए जैसी सरपट चाल
चाहे बबूल सी डाली दो
या चम्पा सी कांटो वाली दो
हे राम मुझे एक साली दो
गोरी दो या काली दो।

लेखक
ॐ  जितेन्द्र सिंह तोमर
[औरत की व्यथा (कविता संग्रह) से साभार]



Comments

Popular posts from this blog

संपूर्ण सत्यनारायण व्रत कथा।

कैसा दिखाई देता था शताब्दियों पहले दिल्ली शहर; अनदेखी तस्वीरों में देख लीजिये

पर काया प्रवेश