26. पिता (पितृ दिवस)

26. पिता (पितृ दिवस)
पिता रोटी है, कपडा है और है मकान,
पिता छोटे से परिंदे का है बडा-साआसमान,

पिता नीम का पेड़ है, कड़वा पित्त समान,
जरूरत पडने पर छाया ओर औषधि महान।।

पिता जीवन की अभिव्यक्ति और परिवार का कठोर अनुशासन,
दूसरी ओर अप्रदर्शित-अनंत प्रेम से चलने वाला प्रशासन।

पिता परिवार के तन के लिए वस्त्र,
बेटी का सिर का छत्र, 
तो बेटे की बाजुओं का, वह है एक मजबूत अस्त्र

भटकते हुए मन का आकार है, देव जो एक साकार हैं।
पिता मेरे स्वाभिमान, अभिमान और परमपिता का उपकार है।

पिता, मोम से हदय वाला सख्त शिलालेख हैं
हमारे सुनहरे भविष्य का आलेख हैं
बरगद की शाखाओं सी परिवार की सृष्टि है
पिता, बरगद की जडे जैसे जीवन की अभिव्यक्ति है

मील का पत्थर है, तन से अब जर्जर हैं
मौन रहकर भी मेरा संबल है

मेरा प्यारा और दुलारा है, मेरा पिता सबसे न्यारा है। पिता अप्रदर्शित-अनंत प्यार है,
पिता है तो बच्चों को इंतज़ार है,

पिता से ही बच्चों के ढेर सारे सपने हैं,
पिता है तो बाज़ार के सब खिलौने अपने हैं

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