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धरती पर प्यार से चार शब्दों की रचना हुयी है

धरती पर प्यार से चार शब्दों की रचना हुयी है ....... (1)Friend (2)Boyfriend (3)Girlfriend (4)Family किन्तु एक बात ध्यान देने वाली है जानते हैं वह क्या है चलो हम हैं आपको बता देते हैं।  पहले जो तीन शब्द हैं अर्थात Friend, Boyfriend और Girlfriend  क्या कभी इन पर ध्यान दिया है। ध्यान तो बहुत दिया होगा परंतु एक बात नहीं देखी होगी कि इन दोनो शब्दों के अन्तिम तीन अक्षर से बनता है "end" अर्थात समाप्त।  इसलिये ये सम्बन्ध एक दिन ख़त्म हो जाते हैं  अर्थात इनका एंड हो जाता है, परन्तु चौथा शब्द है Family जिसके पहले तीन अक्षर से बनता है : Fam = Father and mother का संक्षिप्त रूप है और अन्तिम हिस्सा ily प्रेम भरे 3 अक्षरों का संक्षिप्त रूप है अर्थात ily = i love you , अत: जिस शब्द का आरम्भ पिता एंव माता से और अन्त प्यार के साथ हो , वह शब्द सही मायने मे परिवार है ।  Plzzz share all Friends......

श्री बांके बिहारी मंदिर , वृंदावन की कथा व महत्व

श्री बांके बिहारी मंदिर , वृंदावन की कथा व महत्व-👇 बांके बिहारी मंदिर भारत में मथुरा जिले के वृंदावन धाम में रमण रेती पर स्थित है। यह भारत के प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। बांके बिहारी कृष्ण का ही एक रूप है जो इसमें प्रदर्शित किया गया है। इसका निर्माण 1863 में स्वामी हरिदास ने करवाया था श्री बाँकेबिहारी जी का संक्षिप्त इतिहास ---- श्रीधाम वृन्दावन, यह एक ऐसी पावन भूमि है, जिस भूमि पर आने मात्र से ही सभी पापों का नाश हो जाता है। ऐसा आख़िर कौन व्यक्ति होगा जो इस पवित्र भूमि पर आना नहीं चाहेगा तथा श्री बाँकेबिहारी जी के दर्शन कर अपने को कृतार्थ करना नहीं चाहेगा। यह मन्दिर श्री वृन्दावन धाम के एक सुन्दर इलाके में स्थित है। कहा जाता है कि इस मन्दिर का निर्माण स्वामी श्री हरिदास जी के वंशजो के सामूहिक प्रयास से किया गया। मन्दिर निर्माण के शुरूआत में किसी दान-दाता का धन इसमें नहीं लगाया गया। श्रीहरिदास स्वामी विषय उदासीन वैष्णव थे। उनके भजन–कीर्तन से प्रसन्न हो निधिवन से श्री बाँकेबिहारीजी प्रकट हुये थे। स्वामी हरिदास जी का जन्म संवत 1536 में भाद्रपद महिने के शुक्ल पक्ष में अष्टम...

ठाकुर जी का रुला देने वाला प्रसंग

ठाकुर जी का रुला देने वाला प्रसंग🌷*   *नंद बाबा चुपचाप रथ पर कान्हा के वस्त्राभूषणों की गठरी रख रहे थे। दूर ओसारे में मूर्ति की तरह शीश झुका कर खड़ी यशोदा को देख कर कहा- दुखी क्यों हो यशोदा, दूसरे की वस्तु पर अपना क्या अधिकार?* *यशोदा ने शीश उठा कर देखा नंद बाबा की ओर, उनकी आंखों में जल भर आया था। नंद निकट चले आये। यशोदा ने भारी स्वर से कहा- तो क्या कान्हा पर हमारा कोई अधिकार नहीं? ग्यारह वर्षों तक हम असत्य से ही लिपट कर जीते रहे?* *नंद ने कहा- अधिकार क्यों नहीं, कन्हैया कहीं भी रहे, पर रहेगा तो हमारा ही लल्ला न! पर उसपर हमसे ज्यादा देवकी वसुदेव का अधिकार है, और उन्हें अभी कन्हैया की आवश्यकता भी है।* *यशोदा ने फिर कहा- तो क्या मेरे ममत्व का कोई मोल नहीं?* *नंद बाबा ने थके हुए स्वर में कहा- ममत्व का तो सचमुच कोई मोल नहीं होता यशोदा। पर देखो तो, कान्हा ने इन ग्यारह वर्षों में हमें क्या नहीं दिया है।*  *उम्र के उत्तरार्ध में जब हमने संतान की आशा छोड़ दी थी, तब वह हमारे आंगन में आया। तुम्हें नहीं लगता कि इन ग्यारह वर्षों में हमने जैसा सुखी जीवन जिया है, वैसा कभी नहीं जी सके थे...

भगवान् का अड्रेस

(((( भगवान् का अड्रेस )))) . रात के ढाई बजे थे, एक सेठ को नींद नहीं आ रही थी, वह घर में चक्कर पर चक्कर लगाये जा रहा था। . पर चैन नहीं पड़ रहा था। आखिर थक कर नीचे उतर आया और कार निकाली.. शहर की सड़कों पर निकल गया।  . रास्ते में एक मंदिर देखा.. सोचा थोड़ी देर इस मंदिर में जाकर भगवान् के पास बैठता हूँ। प्रार्थना करता हूं तो शायद शांति मिल जाये। . वह सेठ मंदिर के अंदर गया तो देखा, एक दूसरा आदमी पहले से ही भगवान की मूर्ति के सामने बैठा था.. . मगर उसका उदास चेहरा, आंखों में करूणा दर्शा रही थी। . सेठ ने पूछा "क्यों भाई इतनी रात को मन्दिर में क्या कर रहे हो ?" . आदमी ने कहा.. "मेरी पत्नी अस्पताल में है, सुबह यदि उसका आपरेशन नहीं हुआ तो वह मर जायेगी और मेरे पास आपरेशन के लिए पैसा नहीं है" . उसकी बात सुनकर सेठ ने जेब में जितने रूपए थे वह उस आदमी को दे दिए।  . अब गरीब आदमी के चहरे पर चमक आ गईं थीं। . सेठ ने अपना कार्ड दिया और कहा इसमें फोन नम्बर और पता भी है और जरूरत हो तो निसंकोच बताना। . उस गरीब आदमी ने कार्ड वापिस दे दिया और कहा "मेरे पास उसका पता है" इस पते की जर...

सृष्टि व विनाश निश्चित है।

*🌳🦚आज की अमृत कथा🦚🌳* *💐💐सृष्टि व विनाश निश्चित है।💐💐* भगवान राम जानते थे कि उनकी मृत्यु का समय हो गया है। वह जानते थे कि जो जन्म लेता है उसे मरना ही पड़ता है। यही जीवन चक्र है। और मनुष्य देह  की सीमा और विवशता भी यही है। उन्होंने कहा...  “यम को मुझ तक आने दो। बैकुंठ धाम जाने का समय अब आ गया है”  मृत्यु के देवता यम स्वयं अयोध्या में घुसने से डरते थे। क्योंकि उनको राम के परम भक्त और उनके महल के मुख्य प्रहरी हनुमान से भय लगता था। उन्हें पता था कि हनुमानजी के रहते यह सब आसान नहीं। भगवान श्रीराम इस बात को अच्छी तरह से समझ गए थे कि, उनकी मृत्यु को अंजनी पुत्र कभी स्वीकार नहीं कर पाएंगे, और वो रौद्र रूप में आ गए, तो समस्त धरती कांप उठेगी। उन्होंने सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा से इस विषय मे बात की। और अपने मृत्यु के सत्य से अवगत कराने के लिए राम जी ने अपनी अंगूठी को महल के फर्श के एक छेद में से गिरा दिया!  और हनुमान से इसे खोजकर लाने के लिए कहा।  हनुमान ने स्वयं का स्वरुप छोटा करते हुए बिल्कुल भंवरे जैसा आकार बना लिया...और अंगूठी को तलाशने के लिये उस छोटे से छ...

चमत्कारी कथा "ब्रज की माटी"

🌹🌹चमत्कारी कथा "ब्रज की माटी"🌹🌹 देवताओं ने व्रज में कोई ग्वाला कोई गोपी कोई गाय, कोई मोर तो कोई तोते के रूप में जन्म लिया।कुछ देवता और ऋषि रह गए थे।वे सभी ब्रह्माजी के पास आये और कहने लगे कि ब्रह्मदेव आप ने हमें व्रज में क्यों नही भेजा? आप कुछ भी करिए किसी भी रूप में भेजिए।ब्रह्मा जी बोले व्रज में जितने लोगों को भेजना संभव था उतने लोगों को भेज दिया है अब व्रज में कोई भी जगह खाली नहीं बची है। देवताओं ने अनुरोध किया प्रभु आप हमें ग्वाले ही बना दें ब्रह्माजी बोले जितने लोगों को बनाना था उतनों को बना दिया और ग्वाले नहीं बना सकते।देवता बोले प्रभु ग्वाले नहीं बना सकते तो हमे बरसाने को गोपियां ही बना दें ब्रह्माजी बोले अब गोपियों की भी जगह खाली नही है।देवता बोले गोपी नहीं बना सकते, ग्वाला नहीं बना सकते तो आप हमें गायें ही बना दें। ब्रह्माजी बोले गाएं भी खूब बना दी हैं।अकेले नन्द बाबा के पास नौ लाख गाएं हैं।अब और गाएं नहीं बना सकते। देवता बोले प्रभु चलो मोर ही बना दें।नाच-नाच कर कान्हा को रिझाया करेंगे।ब्रह्माजी बोले मोर भी खूब बना दिए। इतने मोर बना दिए की व्रज में समा नहीं पा रह...

रक्षाबन्धन ग्यारह अगस्त ,को अथवा बारह, अगस्त को ? शास्त्र के प्रमाण

रक्षाबन्धन ग्यारह अगस्त ,को अथवा बारह, अगस्त को  ? शास्त्र के प्रमाण :------------------- 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹                                 " इदं भद्रायां न कार्यम्"  । अर्थात् मुख्यतः यह दो कार्य भद्रा काल में ना करें,  फिर चाहे भद्राकाल स्वर्ग की हो अथवा पाताल की। द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा । श्रावणी नृपतिं हन्तिं ग्रामं दहति फाल्गुनी!! अर्थात् :- भद्राकाल में रक्षाबंधन और होलिका दहन कदापि ना करें  :-- धर्मसिन्धु अब जो बड़े-बड़े विद्वान कहते हैं कि भद्राकाल पाताल की है इसलिए हानि नहीं करेगी ! जो पंचांगकार 11 अगस्त 2022 को दिन में रक्षाबंधन का मुहूर्त दे रहे हैं वह शास्त्रों के विरुद्ध है ! कम से कम धर्मसिंधु और निर्णय सिंधु के वचनों की ओर ध्यान तो दो उसमें जब स्पष्ट रूप से भद्रा काल में 2 कार्यों को करने के लिए मना किया गया है तो आप उसे भद्रा काल में ही करने/कराने पर क्यों तुले हुए हैं!  क्या आप रावण के परिवार से हैं ? भद्रा काल में रावण की बहन ने,रावण को रा...